उपसर्ग (Upsarg)

उपसर्ग (Upsarg)

उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो किसी शब्द के आरम्भ में जुड़कर उसके अर्थ में विशेष परिवर्तन या विस्तार कर देते हैं। ये स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त नहीं होते, बल्कि मूल शब्द के साथ मिलकर ही अर्थपूर्ण बनते हैं। “उपसर्ग” शब्द ‘उप’ (अर्थात् समीप) और ‘सर्ग’ (अर्थात् सृजन या उत्पत्ति) से मिलकर बना है, जिसका आशय है किसी शब्द के साथ जुड़कर उसके अर्थ का निर्माण या परिवर्तन करना। हिंदी व्याकरण में प्रचलित रूप से 13 प्रमुख उपसर्ग माने जाते हैं, जबकि संस्कृत भाषा में इनकी संख्या लगभग 22 बताई गई है। 

उपसर्ग की परिभाषा:

जो शब्दांश किसी मूल शब्द के पहले लगकर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं।

👉 उदाहरण:

सु + पुत्र = सुपुत्र

दुर् + गंध = दुर्गंध

वि + नाश = विनाश

यदि आप चाहें तो मैं उपसर्ग के भेद, उदाहरण और महत्वपूर्ण प्रश्न भी बता सकता हूँ।

upsarg

उपसर्ग का अर्थ :

‘उपसर्ग’ शब्द दो भागों से मिलकर बना है— उप और सर्ग। यहाँ ‘उप’ का अर्थ होता है निकट, पास या समीप और ‘सर्ग’ का अर्थ है जोड़ना, मिलाना या उत्पन्न करना। इस प्रकार उपसर्ग का शाब्दिक अर्थ हुआ— किसी शब्द के साथ पहले जुड़ने वाला वह अंश जो उसके अर्थ में परिवर्तन कर दे। व्याकरण की दृष्टि से उपसर्ग वह शब्दांश है जो किसी मूल शब्द (धातु या संज्ञा) के आगे लगकर उसके अर्थ को विशेष, विस्तृत, विपरीत या भिन्न बना देता है। उपसर्ग स्वयं में पूर्ण शब्द नहीं होते, बल्कि वे किसी अन्य शब्द के साथ मिलकर ही अपना अर्थ स्पष्ट करते हैं। उदाहरण के लिए, ‘सु’ का अर्थ है अच्छा; जब यह ‘कर्म’ शब्द के आगे जुड़ता है तो ‘सुकर्म’ बनता है, जिसका अर्थ है अच्छा कार्य। इसी प्रकार ‘दुर्’ का अर्थ है बुरा या कठिन; ‘भाग्य’ के साथ जुड़कर ‘दुर्भाग्य’ बनाता है, जिसका अर्थ है खराब भाग्य। ‘प्र’ उपसर्ग ‘गति’ के साथ मिलकर ‘प्रगति’ बनाता है, जिसका अर्थ है आगे बढ़ना। इस प्रकार उपसर्ग शब्द के अर्थ में परिवर्तन लाकर भाषा को अधिक प्रभावशाली और अर्थपूर्ण बनाते हैं।

यहाँ उपसर्ग के कुछ स्पष्ट उदाहरण दिए जा रहे हैं —

सु + पुत्र = सुपुत्र (अच्छा पुत्र)

दुर् + गंध = दुर्गंध (बुरी गंध)

प्र + हार = प्रहार (आक्रमण करना)

वि + ज्ञान = विज्ञान (विशेष ज्ञान)

अ + ज्ञानी = अज्ञानी (जो ज्ञानी न हो)

अनु + शासन = अनुशासन (नियमों का पालन)

परि + वार = परिवार (चारों ओर रहने वाले लोग)

अति + सुंदर = अतिसुंदर (बहुत अधिक सुंदर)

इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि जब उपसर्ग किसी मूल शब्द के पहले जुड़ता है, तो उसके अर्थ में परिवर्तन आ जाता है।

उपसर्ग की पहचान :

उपसर्ग की पहचान करने के लिए यह देखना आवश्यक होता है कि किसी शब्द के आरंभ में जुड़ा हुआ शब्दांश उसके मूल शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर रहा है या नहीं। यदि किसी शब्द के प्रारंभ में लगा अंश हटाने पर एक स्वतंत्र और अर्थपूर्ण मूल शब्द प्राप्त होता है, तो वह जुड़ा हुआ अंश उपसर्ग कहलाता है। अर्थात् उपसर्ग सदैव शब्द के पहले लगता है और उसके अर्थ को विशेष, विपरीत, अधिक या भिन्न बना देता है।

उदाहरण के लिए, ‘असत्य’ शब्द में ‘अ’ हटाने पर ‘सत्य’ शब्द बचता है, जिसका अर्थ है सच। यहाँ ‘अ’ उपसर्ग है, जो शब्द के अर्थ को उल्टा कर देता है। इसी प्रकार ‘दुर्भाग्य’ में ‘दुर्’ हटाने पर ‘भाग्य’ शब्द मिलता है; ‘प्रगति’ में ‘प्र’ हटाने पर ‘गति’ शब्द शेष रहता है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि जो अंश शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन करे और हटाने पर मूल शब्द स्पष्ट दिखाई दे, वही उपसर्ग होता है।

उपसर्ग की पहचान के उदाहरण :

अ + न्याय = अन्याय
→ ‘अ’ हटाने पर ‘न्याय’ शब्द मिलता है। यहाँ ‘अ’ उपसर्ग है, जो अर्थ को विपरीत बना देता है।

दुर् + व्यवहार = दुर्व्यवहार
→ ‘दुर्’ हटाने पर ‘व्यवहार’ शब्द मिलता है। ‘दुर्’ उपसर्ग अर्थ को बुरा या गलत बना रहा है।

प्र + लेख = प्रलेख
→ ‘प्र’ हटाने पर ‘लेख’ शब्द बचता है। ‘प्र’ उपसर्ग शब्द के अर्थ को विशेष बनाता है।

वि + शेष = विशेष
→ ‘वि’ हटाने पर ‘शेष’ शब्द मिलता है। ‘वि’ उपसर्ग अर्थ में भिन्नता या विशेषता लाता है।

अति + उत्साह = अतिउत्साह
→ ‘अति’ हटाने पर ‘उत्साह’ शब्द प्राप्त होता है। ‘अति’ अधिकता का बोध कराता है।

हिन्दी के उपसर्ग

हिंदी भाषा में अनेक ऐसे उपसर्ग प्रचलित हैं जो सामान्य बोलचाल और लेखन दोनों में प्रयुक्त होते हैं। इन उपसर्गों की संख्या लगभग 13 मानी जाती है। ये शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में विशेष परिवर्तन करते हैं। प्रमुख हिंदी उपसर्ग हैं – , अन, , कु, दु, नि, औ/अव, भर, सु, अध, उन, पर, बिन आदि। नीचे इनके अर्थ और उदाहरण दिए जा रहे हैं —

1️ अ – (अभाव या निषेध का बोध)

यह उपसर्ग किसी गुण या स्थिति के अभाव को दर्शाता है।
उदाहरण: अज्ञान, असमान, अयोग्य

2️ अध – (आधा या अपूर्ण)

यह किसी कार्य या वस्तु के अधूरेपन को प्रकट करता है।
उदाहरण: अधलिखा, अधखिला, अधसोया

3️ अन – (निषेध या कमी)

यह भी अभाव या नकारात्मकता को दर्शाता है।
उदाहरण: अनदेखा, अनसुना, अनचाहा

4️ उन – (एक कम)

संख्या में एक की कमी को प्रकट करने के लिए प्रयोग होता है।
उदाहरण: उनतीस, उनचास, उनसत्तर

5️ औ / अव – (हीनता या अभाव)

किसी गुण की कमी या दोष को व्यक्त करता है।
उदाहरण: अवगुण, अवसर (विशेष अर्थ में), अवमान

6️ क – (निकृष्ट या बुरा)

यह उपसर्ग हीनता या दोष का भाव व्यक्त करता है।
उदाहरण: कचरापन, ककर्म (दुष्कर्म के अर्थ में)

7️ कु – (बुरा या अशुभ)

यह नकारात्मक या अनुचित अर्थ देता है।
उदाहरण: कुपथ, कुसंग, कुबुद्धि

8️ दु – (बुरा, कठिन या दोषपूर्ण)

यह कष्ट, बुराई या कमी का बोध कराता है।
उदाहरण: दुर्गति, दुश्चरित्र, दुराचार

9️ नि – (रहित या बिना)

यह किसी वस्तु या गुण की कमी को दर्शाता है।
उदाहरण: निस्सहाय, निःस्वार्थ, निष्क्रिय

🔟 पर – (दूसरा या पराया)

यह भिन्नता या परोपकार का भाव प्रकट करता है।
उदाहरण: परदेश, परनिंदा, पराधीन

1️1️ बिन – (बिना या अभाव)

किसी वस्तु के न होने का संकेत देता है।
उदाहरण: बिनसोचे, बिनकहे, बिनसहारे

1️2️ भर – (पूर्णता)

यह सम्पूर्णता या अधिकता का बोध कराता है।
उदाहरण: भरदिन, भरजीवन, भरहाथ

1️3️ सु – (अच्छा या श्रेष्ठ)

यह किसी गुण की श्रेष्ठता को व्यक्त करता है।
उदाहरण: सुकर्म, सुमन, सुभाषित

समास में उपसर्ग का प्रयोग

हिंदी में कुछ उपसर्ग ऐसे भी होते हैं जिनका प्रयोग समास निर्माण में किया जाता है। उदाहरण के रूप में —
ति + राहा = तिराहा, जिसका अर्थ है तीन मार्गों का मिलन स्थान। यहाँ ‘ति’ संख्या का बोध कराता है, इसलिए यह द्विगु समास का उदाहरण माना जाता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि कुछ उपसर्ग संख्यावाची रूप में भी प्रयुक्त होते हैं और समास का निर्माण करते हैं।

उपसर्ग के भेद / प्रकार

उपसर्ग_की_पहचान_के_उदाहरण_अ_+_न्याय_=_अन्याय_→_‘अ’_हटाने_पर_‘न्याय’ (1)

उपसर्ग के भेद / प्रकार

हिंदी भाषा में उपसर्गों को मुख्यतः तीन वर्गों में रखा जाता है —1️⃣ तत्सम उपसर्ग
2️⃣ तद्भव उपसर्ग
3️⃣ आगत उपसर्ग

1️ तत्सम उपसर्ग

जो उपसर्ग संस्कृत भाषा से ज्यों-के-त्यों हिंदी में ग्रहण किए गए हैं, उन्हें तत्सम उपसर्ग कहा जाता है। ये प्रायः शुद्ध एवं साहित्यिक शब्दों के साथ प्रयुक्त होते हैं।

उदाहरण :

अधि + कार = अधिकार

आ + गमन = आगमन

प्रति + क्रिया = प्रतिक्रिया

परि + नाम = परिणाम

2️ तद्भव उपसर्ग

वे उपसर्ग जो मूलतः संस्कृत से विकसित होकर परिवर्तित रूप में हिंदी में प्रचलित हुए, तद्भव उपसर्ग कहलाते हैं। इनका प्रयोग सामान्य हिंदी शब्दों के साथ होता है।

उदाहरण :

अ + चल = अचल

क + पूत = कपूत

अन + देखा = अनदेखा

3️ आगत उपसर्ग

जो उपसर्ग अरबी, फ़ारसी, उर्दू या अंग्रेज़ी जैसी विदेशी भाषाओं से हिंदी में आए हैं, वे आगत उपसर्ग कहलाते हैं। आधुनिक हिंदी में इनका व्यापक प्रयोग होता है।

उदाहरण :

बद + हाल = बदहाल

खुश + किस्मत = खुशकिस्मत

बे + असर = बेअसर

तत्सम उपसर्ग (अर्थ सहित)

नीचे प्रमुख तत्सम उपसर्ग उनके अर्थ और उदाहरण सहित दिए जा रहे हैं —

उपसर्ग

अर्थ

उदाहरण

अति

अत्यधिक

अतिशय, अतिसुंदर, अतिभार

अधि

ऊपर, श्रेष्ठ

अधिपति, अधिनियम

अनु

पीछे, अनुसार

अनुसरण, अनुकरण

अप

बुरा, दोषयुक्त

अपमान, अपकीर्ति

नहीं

अज्ञान, अयोग्य

अभि

सामने, ओर

अभिवादन, अभिरुचि

पूर्ण रूप से

आगमन, आचार

उत्

ऊँचा, ऊपर

उत्कर्ष, उत्तम

उप

निकट

उपकार, उपवन

दुर्

कठिन, बुरा

दुराचार, दुर्गंध

निर्

रहित

निर्दोष, निर्भय

नि

नीचे, बिना

निस्सार, निष्काम

परा

विपरीत, दूर

पराजित, पराभव

प्रति

विरोध, प्रत्येक

प्रतिदिन, प्रतिवाद

परि

चारों ओर

परिक्रमा, परिवर्तन

प्र

आगे, अधिक

प्रगति, प्रयत्न

संस्कृत के शब्दों का उपसर्ग के रूप में प्रयोग

हिंदी भाषा में कुछ ऐसे संस्कृत मूल के शब्द भी पाए जाते हैं जो स्वतंत्र शब्द होने के साथ-साथ उपसर्ग की तरह भी प्रयुक्त होते हैं। ये शब्द किसी अन्य शब्द के पूर्व लगकर उसके अर्थ में विशेष परिवर्तन या विस्तार कर देते हैं। नीचे ऐसे प्रमुख शब्द उनके अर्थ और उदाहरण सहित दिए जा रहे हैं —

उपसर्ग

अर्थ

उदाहरण

कु

बुरा, अशुभ

कुचेष्टा, कुप्रथा, कुदृष्टि

सु

उत्तम, श्रेष्ठ

सुभाषित, सुयोग्य, सुशिक्षित

पुरः

आगे, सम्मुख

पुरोगामी, पुरोवर्ती

पुनः

दोबारा, फिर से

पुनर्निर्माण, पुनर्परीक्षा

चिर

लंबे समय तक

चिरस्थायी, चिरनिद्रा

सहित, साथ

सपरिवार, ससम्मान

सत्

श्रेष्ठ, सद्

सत्संग, सत्पुरुष

आविः

प्रकट रूप में

आविर्भूत, आविर्दर्शन

संक्षिप्त व्याख्या

इन संस्कृत शब्दों का प्रयोग उपसर्ग के रूप में होने पर ये शब्द के अर्थ को सकारात्मक, नकारात्मक, दीर्घकालिक या पुनरावृत्ति संबंधी भाव प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, ‘पुनः’ के जुड़ने से किसी कार्य के दोबारा होने का संकेत मिलता है, जबकि ‘चिर’ लंबे समय की स्थायित्व का बोध कराता है। इसी प्रकार ‘सु’ और ‘सत्’ श्रेष्ठता या अच्छाई का भाव व्यक्त करते हैं, जबकि ‘कु’ अशुभ या बुरे अर्थ को दर्शाता है।

तद्भव उपसर्ग के उदाहरण

तद्भव उपसर्ग वे हैं जो मूलतः संस्कृत से विकसित होकर परिवर्तित रूप में हिंदी में प्रचलित हुए। ये प्रायः बोलचाल और सामान्य हिंदी शब्दों के साथ प्रयुक्त होते हैं। नीचे प्रमुख तद्भव उपसर्ग उनके अर्थ और उदाहरण सहित दिए जा रहे हैं —

उपसर्ग

अर्थ

उदाहरण

अभाव या कमी

उखड़ा, उजला (विशेष अर्थ में)

बुरा, निकृष्ट

कचरा, कजोर (दोषयुक्त अर्थ में)

नि

बिना, रहित

निस्सहाय, निकारा, निठल्ला

भर

पूरा, संपूर्ण

भरदिन, भरसक

अन

अभाव, निषेध

अनदेखा, अनसुना, अनचाहा

उन्

एक कम

उनचास, उनहत्तर

दु

दो या दोषयुक्त

दुबारा (दो बार), दुगना

अध

आधा, अपूर्ण

अधलिखा, अधखुला

संक्षिप्त व्याख्या

तद्भव उपसर्ग सामान्यतः हिंदी के व्यवहारिक शब्दों के साथ जुड़ते हैं और अर्थ में सरल परिवर्तन करते हैं। जैसे ‘अन’ किसी गुण के अभाव को दर्शाता है, ‘भर’ पूर्णता का बोध कराता है, ‘अध’ अधूरेपन को व्यक्त करता है, और ‘दु’ कभी दो की संख्या तो कभी दोष का भाव प्रकट करता है।

बहुत अच्छा 👍
नीचे आपके दिए गए विदेशी / आगत उपसर्ग को नए उदाहरणों और व्यवस्थित शैली में प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि सामग्री अधिक मौलिक और स्पष्ट रूप में तैयार हो सके।

विदेशी / आगत उपसर्ग के उदाहरण

जो उपसर्ग अरबी, फ़ारसी, उर्दू आदि विदेशी भाषाओं से हिंदी में आए हैं, उन्हें आगत उपसर्ग कहा जाता है। आधुनिक हिंदी में इनका प्रयोग सामान्य बोलचाल, साहित्य और पत्रकारिता में व्यापक रूप से मिलता है। ये शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में विशेष परिवर्तन कर देते हैं।

नीचे प्रमुख आगत उपसर्ग उनके अर्थ और उदाहरण सहित दिए जा रहे हैं —

उपसर्ग

अर्थ

उदाहरण

कम

थोड़ा, न्यून

कमअक्ल, कमदाम, कमतरी

खुश

प्रसन्न, अच्छा

खुशहाल, खुशमिज़ाज, खुशरंग

बा

सहित, के साथ

बाकमाल, बाशऊर, बाअसर

दर

के भीतर, में

दरकिनार, दरमियान

ना

नहीं, निषेध

नाकाम, नामंजूर, नासमझ

ला

बिना, रहित

लाचार, लापरवाह, लावारिस

सर

प्रधान, मुख्य

सरदार, सरनाम

हम

साथ, समान

हमराह, हमपाठी, हमख़याल

हर

प्रत्येक

हरदिन, हरबार

बे

बिना, रहित

बेमिसाल, बेखबर, बेबस

गैर

दूसरा, भिन्न

गैरकानूनी, गैरसरकारी, गैरमौजूद

 

संक्षिप्त व्याख्या

आगत उपसर्ग हिंदी शब्दावली को समृद्ध बनाते हैं और भाषा में विविधता लाते हैं। जैसे ‘बे’ और ‘ला’ किसी वस्तु या गुण की कमी को दर्शाते हैं, ‘खुश’ सकारात्मक भाव व्यक्त करता है, जबकि ‘गैर’ भिन्नता या अलगाव का संकेत देता है।

संस्कृत के उपसर्ग

संस्कृत भाषा में उपसर्गों की संख्या परंपरागत रूप से 22 मानी जाती है। ये उपसर्ग हिंदी में भी व्यापक रूप से प्रयुक्त होते हैं। प्रमुख संस्कृत उपसर्ग हैं

अति, अधि, अनु, अन्, अप, अपि, अभि, अव, , उत्, उद्, उप, दुर्/दुस्, नि, निर्/निस्, परा, परि, प्र, प्रति, वि, सम्, सु आदि।

नीचे प्रमुख उपसर्ग उनके अर्थ और उदाहरण सहित दिए जा रहे हैं —

1️ अति

अर्थ: अत्यधिक, सीमा से परे
उदाहरण: अतिशय, अतिक्रमण, अतिवाद, अत्यधिक, अतिरेक

2️ अधि

अर्थ: ऊपर, प्रधान
उदाहरण: अधिपति, अधिनियम, अधिग्रहण, अध्यक्ष, अधीन

3️ अनु

अर्थ: पीछे-पीछे, अनुसरण करना
उदाहरण: अनुकरण, अनुसरण, अनुवर्ती, अनुरोध, अनुशासन

4️ अन्

अर्थ: अभाव, रहित
उदाहरण: अनंत, अनादर, अनिवार्य (विशेष अर्थ में)

5️ अप

अर्थ: बुरा, दोषयुक्त
उदाहरण: अपमान, अपकीर्ति, अपशब्द, अपव्यय, अपराध

6️ अपि

अर्थ: आवरण या ढकना
उदाहरण: अपिधान

7️ अभि

अर्थ: सामने, ओर
उदाहरण: अभिवादन, अभिलाषा, अभिमुख, अभियान, अभिप्राय

8️ अव

अर्थ: नीच, गिरा हुआ, कम
उदाहरण: अवमानना, अवतार, अवलोकन, अवज्ञा, अवरोध

9️

अर्थ: तक, पूर्ण रूप से
उदाहरण: आगमन, आचरण, आक्रमण, आजीवन, आकलन

🔟 उत्

अर्थ: ऊपर, श्रेष्ठ
उदाहरण: उत्कर्ष, उत्कृष्ट, उत्थान, उत्तम, उत्साह

1️1️ उद्

अर्थ: ऊपर की ओर, प्रकट
उदाहरण: उद्गम, उद्भव, उद्घाटन, उद्बोधन

1️2️ उप

अर्थ: निकट, सहायक
उदाहरण: उपकार, उपवन, उपदेश, उपकेंद्र, उपाधि

1️3️ दुर् / दुस्

मूल रूप “दुः” है, संधि के बाद इसके रूप बदल जाते हैं।
अर्थ: कठिन, बुरा
उदाहरण: दुर्गति, दुर्जन, दुश्चरित्र, दुष्प्रभाव, दुस्साहस

1️4️ नि

अर्थ: नीचे, निषेध, स्थिरता
उदाहरण: निवास, निपुण, नियोजन, निलंबन, निवारण

1️5️ निर् / निस्

मूल रूप “निः” है, संधि के अनुसार रूप बदलता है।
अर्थ: रहित, बिना
उदाहरण: निराश, निर्भय, निष्कलंक, निस्तेज, निष्क्रिय

1️6️ परा

अर्थ: विपरीत, दूर
उदाहरण: पराजय, पराभव, परामर्श

1️7️ परि

अर्थ: चारों ओर, आसपास
उदाहरण: परिक्रमा, परिश्रम, परिवर्तन, परिमाण, परिपूर्ण

1️8️ प्र

अर्थ: आगे, अधिक
उदाहरण: प्रगति, प्रयास, प्रचार, प्रभाव, प्रस्ताव

1️9️ प्रति

अर्थ: विरोध, प्रत्येक, सामने
उदाहरण: प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रतिक्रिया, प्रतिज्ञा, प्रत्यक्ष

2️0️ वि

अर्थ: अलग, विशेष
उदाहरण: विशेष, विज्ञान, विचार, विरोध, विभाजन

2️1️ सम्

अर्थ: साथ, पूर्ण
उदाहरण: संबंध, सम्मान, संग्रह, संवाद, संकल्प

2️2️ सु

अर्थ: अच्छा, श्रेष्ठ
उदाहरण: सुकर्म, सुमन, सुशील, सुगंध, सुपात्र

अरबी, उर्दू और फ़ारसी के उपसर्ग

upsarg ke udahran

हिंदी भाषा में अरबी, उर्दू और फ़ारसी से आए अनेक उपसर्ग प्रचलित हैं। इनकी संख्या लगभग 19 मानी जाती है। ये उपसर्ग सामान्य बोलचाल, साहित्य, पत्रकारिता तथा प्रशासनिक भाषा में व्यापक रूप से प्रयुक्त होते हैं। शब्द के प्रारंभ में जुड़कर ये उसके अर्थ में विशेष परिवर्तन कर देते हैं।

नीचे प्रमुख आगत (विदेशी) उपसर्ग उनके अर्थ और उदाहरण सहित दिए जा रहे हैं —

1️ अल – (निश्चित, विशेष रूप से)

उदाहरण: अलविदा, अलहदा

2️ कम – (कम, न्यून, हीन)

उदाहरण: कमतर, कमहिम्मत, कमदाम

3️ खुश – (अच्छा, प्रसन्न)

उदाहरण: खुशमिज़ाज, खुशरंग, खुशअंदाज़

4️ गैर – (भिन्न, निषेध)

उदाहरण: गैरज़रूरी, गैरहाज़िर, गैरसरकारी

5️ दर – (में, भीतर)

उदाहरण: दरकिनार, दरमियान

6️ ना – (अभाव, नहीं)

उदाहरण: नाकाबिल, नामंज़ूर, नादान

7️ फिल – (में, वर्तमान में)

उदाहरण: फिलवक्त, फिलहाल

8️ फ़ी – (प्रति)

उदाहरण: फ़ीव्यक्ति, फ़ीसदी

9️ ब – (अनुसार, के कारण)

उदाहरण: बशर्ते, बदौलत, बगैर

🔟 बद – (बुरा, दोषयुक्त)

उदाहरण: बदहाल, बदनीयत, बदइंतज़ामी

1️1️ बर – (ऊपर, पर)

उदाहरण: बर्खास्त, बरकरार

1️2️ बा – (सहित, के साथ)

उदाहरण: बामकसद, बाइज़्ज़त, बामौका

1️3️ बे – (बिना, रहित)

उदाहरण: बेमिसाल, बेखबर, बेबस

1️4️ बिल – (के साथ, अंततः)

उदाहरण: बिलकुल, बिलआख़िर

1️5️ बिला – (बिना)

उदाहरण: बिलाशर्त, बिलावजह

1️6️ ला – (रहित)

उदाहरण: लाचार, लावारिस, लापता

1️7️ सर – (प्रधान, मुख्य)

उदाहरण: सरदार, सरनाम, सरमाया

1️8️ हम – (समान, साथ)

उदाहरण: हमराह, हमख़याल, हमनवा

1️9️ हर – (प्रत्येक)

उदाहरण: हरदम, हरघड़ी, हरबार

अंग्रेज़ी के उपसर्ग (अर्थ व उदाहरण सहित)

  1. सब – (अधीनस्थ, निम्न पद)
    उदाहरण: सब-इंस्पेक्टर, सब-एडिटर, सब-ऑफिसर
  2. डिप्टी – (सहायक, प्रतिनिधि)
    उदाहरण: डिप्टी-कमिश्नर, डिप्टी-डायरेक्टर, डिप्टी-सेक्रेटरी
  3. वाइस – (उप, दूसरे स्थान का अधिकारी)
    उदाहरण: वाइस-प्रेसिडेंट, वाइस-प्रिंसिपल, वाइस-चेयरमैन
  4. जनरल – (प्रधान, उच्च स्तर का)
    उदाहरण: जनरल मैनेजर, जनरल एडमिनिस्ट्रेटर, जनरल ऑफिसर
  5. चीफ़ – (मुख्य, सर्वोच्च अधिकारी)
    उदाहरण: चीफ़ जस्टिस, चीफ़ एडवाइज़र, चीफ़ कमांडर
  6. हेड – (प्रमुख, शीर्ष)
    उदाहरण: हेडमास्टर, हेड ऑफिसर, हेड क्लर्क

उपसर्ग के समान प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के अव्यय शब्द

संस्कृत के कुछ अव्यय शब्द ऐसे होते हैं जो उपसर्ग की तरह संज्ञा, विशेषण या क्रिया के पहले जुड़कर उनके अर्थ में विशेष परिवर्तन कर देते हैं। यद्यपि ये शुद्ध रूप से उपसर्ग नहीं माने जाते, फिर भी व्यवहार में इनका प्रयोग उपसर्ग के समान ही होता है। नीचे ऐसे प्रमुख अव्यय शब्द अर्थ और उदाहरण सहित दिए जा रहे हैं —

1️ अधः – (नीचे, निम्न दिशा में)

उदाहरण: अधोगति, अधोलिखित, अधोभाग

2️ अंतः – (भीतर, आंतरिक)

उदाहरण: अंतर्मन, अंतःकरण, अंतःप्रदेश

3️ अ – (अभाव, नहीं)

उदाहरण: अशुद्ध, असत्य, अयोग्य

4️ चिर – (दीर्घकाल, बहुत समय तक)

उदाहरण: चिरस्थायी, चिरस्मरणीय, चिरपरिचित

5️ पुनर् – (फिर से, दोबारा)

उदाहरण: पुनरावलोकन, पुनर्निर्माण, पुनर्स्मरण

6️ बहिर् – (बाहर, बाहरी)

उदाहरण: बहिर्मुखी, बहिर्गमन, बहिर्विश्व

7️ सत् – (सत्य, श्रेष्ठ, उत्तम)

उदाहरण: सत्पुरुष, सत्संग, सत्प्रयास

8️ पुरा – (प्राचीन, पहले का)

उदाहरण: पुरातन, पुरालेख, पुरास्मृति

9️ सम – (समान, बराबर)

उदाहरण: समदर्शी, समवेत, समभाव

🔟 सह – (साथ, मिलकर)

उदाहरण: सहपाठी, सहलेखक, सहयोग

स्मरणीय तथ्य (उपसर्ग)

उपसर्ग वे शब्दांश हैं जो किसी मूल शब्द के प्रारम्भ में जुड़ते हैं।

इनका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं किया जाता, अर्थात् ये अकेले अर्थपूर्ण शब्द नहीं होते।

उपसर्ग जब किसी शब्द के पहले लगते हैं, तो उसके अर्थ में परिवर्तन, विस्तार या विशेष अर्थ उत्पन्न कर देते हैं।

एक ही उपसर्ग के कई भिन्न-भिन्न अर्थ हो सकते हैं।

उपसर्गों की सहायता से विलोम शब्द भी बनाए जाते हैं।
उदाहरण: सत्य – असत्य, न्याय – अन्याय, हिंसा – अहिंसा।

हिंदी भाषा में उपसर्ग मुख्यतः तीन वर्गों में विभाजित किए जाते हैं —
(1) तत्सम, (2) तद्भव, (3) आगत (विदेशी)।

“उपसर्ग” शब्द के अन्य अर्थ

व्याकरण के अतिरिक्त “उपसर्ग” शब्द का प्रयोग अन्य संदर्भों में भी किया जाता है —

1️ उत्पात या सह-उत्पाद (By-product) के अर्थ में

किसी वस्तु के निर्माण के दौरान जो अन्य पदार्थ अनायास उत्पन्न हो जाता है, उसे भी उपसर्ग कहा जाता है।
उदाहरण: गन्ने से गुड़ बनाते समय जो शीरा प्राप्त होता है, वह गुड़ का सह-उत्पाद (उपसर्ग) माना जा सकता है।

2️ विघ्न, बाधा या अपशकुन के अर्थ में

किसी शुभ कार्य या साधना के बीच उत्पन्न रुकावट को भी उपसर्ग कहा जाता है। विशेषकर योग-साधना में आने वाली बाधाएँ उपसर्ग कहलाती हैं।

धार्मिक साहित्य में उपसर्ग

प्राचीन ग्रंथों में उपसर्ग शब्द का प्रयोग साधना में आने वाली कठिनाइयों के लिए भी हुआ है। विशेष रूप से जैन साहित्य में साधकों को मिलने वाले उपसर्गों का विस्तृत वर्णन मिलता है। जैन मत के अनुसार साधना के मार्ग में अनेक प्रकार की बाधाएँ आना स्वाभाविक है, और जो साधक धैर्यपूर्वक इन उपसर्गों को सहन कर लेता है, वही अंततः सिद्धि प्राप्त करता है।

हिंदू धार्मिक कथाओं में भी तपस्या या साधना के दौरान अनेक विघ्नों का उल्लेख मिलता है, यद्यपि वहाँ हर स्थान पर उन्हें “उपसर्ग” शब्द से संबोधित नहीं किया गया है।

 

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