रस RAS– परिभाषा, भेद और उदाहरण | हिन्दी व्याकरण
🌸 रस RAS– परिभाषा, भेद और उदाहरण | हिन्दी व्याकरण
✨ भूमिका
Ras हिन्दी काव्यशास्त्र में रस को आत्मा कहा गया है। जिस प्रकार आत्मा के बिना शरीर की कल्पना नहीं की जा सकती, उसी प्रकार रस के बिना कोई रचना पूर्ण नहीं मानी जाती। यह लेख आपको रस की परिभाषा, भेद, उदाहरण, सिद्धांत तथा इसके विभिन्न आयामों के बारे में पूर्ण जानकारी देगा।
📘 रस क्या होता है?
रस का शाब्दिक अर्थ है “आनन्द”। जब कोई व्यक्ति काव्य का पठन या श्रवण करता है और उसके हृदय में एक विशेष भाव उत्पन्न होकर अलौकिक आनंद देता है, उसी अनुभूति को रस कहते हैं।
रस वही है जो पाठक या श्रोता के मन को भावमय कर दे।
📚 व्युत्पत्ति
“रस्यते आस्वाद्यते इति रसः” – जिसका आस्वादन किया जाए वही रस है।
“सरते इति रसः” – जो प्रवाहित हो।
🎭 भरतमुनि और रस सिद्धांत
भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र में रसों को सबसे पहले व्यवस्थित रूप में परिभाषित किया।
उनका प्रसिद्ध सूत्र है –
“विभाव, अनुभाव, संचारी भावों के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।”
उन्होंने 8 रसों की स्थापना की थी। बाद में शांत, वात्सल्य और भक्ति रस को जोड़कर कुल 11 रस माने जाने लगे।
👨🏫 रस की परिभाषा – विभिन्न आचार्यों के अनुसार
| आचार्य | परिभाषा |
|---|---|
| अभिनवगुप्त | आत्मविभोर होकर विषय से एकाकार होने पर उत्पन्न चेतना ही रस है। |
| विश्वनाथ | रस ब्रह्मानंद-सहोदर, स्वप्रकाश और लोकोत्तर चमत्कारयुक्त होता है। |
| मम्मट | विभावादि के संयोग से उत्पन्न आनंदमयी चित्तवृत्ति रस है। |
| श्यामसुंदर दास | स्थायी भाव जब अन्य भावों से युक्त होकर हृदय में उठता है तो वह रस बनता है। |
| रामचंद्र शुक्ल | हृदय की मुक्तावस्था रस दशा कहलाती है। |
⚙️ रस के चार प्रमुख अवयव
स्थायी भाव – मूल और प्रधान भाव, जैसे: रति, करुणा, क्रोध
विभाव – रस उत्पन्न करने वाले कारण (आलंबन व उद्दीपन)
अनुभाव – स्थायी भावों की बाह्य अभिव्यक्तियाँ
संचारी भाव – स्थायी भावों को पुष्ट करने वाले सहायक भाव (33 प्रकार)
🎨 रस और उनके स्थायी भाव (Ras Ke Bhed)
| रस | स्थायी भाव | उदाहरण |
|---|---|---|
| श्रृंगार | रति | नायक-नायिका का प्रेम |
| हास्य | हास | चुटकुला या मूर्खता |
| रौद्र | क्रोध | युद्ध |
| करुण | शोक | मृत्यु या पीड़ा |
| वीर | उत्साह | रणभूमि का साहस |
| अद्भुत | विस्मय | चमत्कारी दृश्य |
| वीभत्स | जुगुप्सा | शव या घृणित दृश्य |
| भयानक | भय | राक्षस, अंधकार |
| शांत | निर्वेद | वैराग्य, साधुता |
| वात्सल्य | वत्सलता | माँ-बेटे का प्रेम |
| भक्ति | देवविषयक रति | मीरा की श्रीकृष्ण भक्ति |
🧠 रस निष्पत्ति का सिद्धांत
रस तब उत्पन्न होता है जब —
स्थायी भाव विभावों से जाग्रत होता है,
अनुभावों से अभिव्यक्त होता है,
और संचारी भावों से पुष्ट होता है।
📝 विशेषताएं (Features of Ras)
रस अखंड होता है
यह स्वप्रकाश और निर्विघ्न होता है
रस का अनुभव व्यक्ति को सामाजिक स्थिति से परे ले जाता है
यह ब्रह्मानंद के समान आनंद देता है
रस ही काव्य की आत्मा है
🔍 विस्तार से अध्ययन
नीचे दिए गए विषयों को अलग-अलग पेजों पर उदाहरण सहित समझाया गया है:
🔹 श्रृंगार रस
🔹 करुण रस
🔹 वीर रस
🔹 भक्ति रस
🔹 हास्य रस
🔹 रौद्र रस
🔹 अद्भुत रस
🔹 वीभत्स रस
🔹 भयानक रस
🔹 शांत रस
🔹 वात्सल्य रस
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हिंदी व्याकरण अध्याय सूची:
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हिन्दी काव्यशास्त्र में रस का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। रस का अर्थ है – आनंद, वह भाव जो कविता या साहित्यिक रचना के माध्यम से पाठक या श्रोता के मन में उत्पन्न होता है।
भारतीय काव्यशास्त्र के अनुसार मूलतः रसों की संख्या नौ (9) मानी गई है, लेकिन समय के साथ वात्सल्य रस को दसवाँ और भक्ति रस को ग्यारहवाँ रस माना गया।
विवेक साहनी द्वारा रचित ग्रंथ “भक्ति रस – पहला रस या ग्यारहवाँ रस” में भक्ति रस को विशेष स्थान प्राप्त है।
इस प्रकार कुल 11 रसों को हिन्दी काव्य में मान्यता प्राप्त है।
📘 1. श्रृंगार रस – Shringar Ras
💖 नायक-नायिका के सौंदर्य और प्रेम से जुड़ा रस
स्थायी भाव: रति
उदाहरण:
बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
सौंह करै भौंहनि हँसै, दैन कहै नहि जाय।
📘 2. हास्य रस – Hasya Ras
😂 वेशभूषा या बोलचाल की विकृति से उत्पन्न हँसी का भाव
स्थायी भाव: हास
उदाहरण:
बुरे समय को देख कर गंजे तू क्यों रोय।
किसी भी हालत में तेरा बाल न बाँका होय।
📘 3. रौद्र रस – Raudra Ras
🔥 अन्याय या अपमान के कारण उत्पन्न क्रोध का भाव
स्थायी भाव: क्रोध
उदाहरण:
श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्षोभ से जलने लगे।
सब शील अपना भूल कर करतल युगल मलने लगे॥
संसार देखे अब हमारे शत्रु रण में मृत पड़े।
करते हुए यह घोषणा वे हो गए उठ कर खड़े॥
📘 4. करुण रस – Karun Ras
😭 वियोग, विनाश या पीड़ा से उत्पन्न शोक का भाव
स्थायी भाव: शोक
उदाहरण:
रही खरकती हाय शूल-सी, पीड़ा उर में दशरथ के।
ग्लानि, त्रास, वेदना – विमण्डित, शाप कथा वे कह न सके।।
📘 5. वीर रस – Veer Ras
⚔️ साहस, पराक्रम और उत्साह से जुड़ा रस
स्थायी भाव: उत्साह
उदाहरण:
बुंदेले हर बोलो के मुख हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।।
📘 6. अद्भुत रस – Adbhut Ras
🌠 आश्चर्य और चमत्कार से जुड़ा रस
स्थायी भाव: विस्मय
उदाहरण:
देख यशोदा शिशु के मुख में, सकल विश्व की माया।
क्षणभर को वह बनी अचेतन, हिल न सकी कोमल काया॥
📘 7. वीभत्स रस – Veebhats Ras
🤢 घृणा या जुगुप्सा से उत्पन्न रस
स्थायी भाव: जुगुप्सा
उदाहरण:
आँखे निकाल उड़ जाते, क्षण भर उड़ कर आ जाते,
शव जीभ खींचकर कौवे, चुभला-चभला कर खाते।
भोजन में श्वान लगे मुरदे थे भू पर लेटे,
खा माँस चाट लेते थे, चटनी सैम बहते बहते बेटे।
📘 8. भयानक रस – Bhayanak Ras
😱 भय, आतंक और घबराहट से जुड़ा रस
स्थायी भाव: भय
उदाहरण:
अखिल यौवन के रंग उभार, हड्डियों के हिलाते कंकाल,
कचो के चिकने काले, व्याल, केंचुली, काँस, सिबार।
📘 9. शांत रस – Shant Ras
🕉️ वैराग्य, आत्मज्ञान और मोक्ष की भावना से उत्पन्न रस
स्थायी भाव: निर्वेद
उदाहरण:
जब मै था तब हरि नाहिं, अब हरि है मै नाहिं,
सब अँधियारा मिट गया जब दीपक देख्या माहिं।
📘 10. वात्सल्य रस – Vatsalya Ras
👶 माता-पिता, गुरु, या बड़ों का स्नेह और ममता
स्थायी भाव: वात्सल्यता
उदाहरण:
बाल दसा सुख निरखि जसोदा, पुनि पुनि नन्द बुलवाति,
अंचरा-तर लै ढ़ाकी सूर, प्रभु कौ दूध पियावति।
📘 11. भक्ति रस – Bhakti Ras
🙏 ईश्वर के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का रस
स्थायी भाव: देव रति
उदाहरण:
प्रेम भगति जस पायिहै, प्रभु सहजहिं मिल जाइ।
कहत कबीर सुनो भाई साधो, भाव बिना नाहिं पाय।।
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❓ Frequently Asked Questions (FAQs) – Ras in Hindi
1️⃣ रस किसे कहते हैं?
रस का शाब्दिक अर्थ है ‘आनन्द’। काव्य को पढ़ने या सुनने से जो आनंद प्राप्त होता है, वही रस कहलाता है। रस को काव्य की आत्मा माना गया है।
2️⃣ रस की परिभाषा क्या है?
श्रव्य काव्य के पठन या श्रवण और दृश्य काव्य के दर्शन व श्रवण में जो अलौकिक आनंद प्राप्त होता है, वह रस कहलाता है।
3️⃣ हिन्दी में मूल रस कितने हैं?
हिन्दी में मूल रूप से 9 रस माने गए हैं:
श्रृंगार, हास्य, रौद्र, करुण, वीर, अद्भुत, वीभत्स, भयानक और शांत रस।
4️⃣ रस के कुल कितने भेद हैं?
रस के कुल 11 भेद माने जाते हैं:
श्रृंगार रस
हास्य रस
रौद्र रस
करुण रस
वीर रस
अद्भुत रस
वीभत्स रस
भयानक रस
शांत रस
वात्सल्य रस
भक्ति रस
भरतमुनि के अनुसार पहले 8 रस माने गए, फिर शांत, भक्ति और वात्सल्य रस जोड़े गए।
5️⃣ रसों की कुल संख्या कितनी है?
कुल रसों की संख्या 11 है। इनमें नौ मूल रसों के साथ वात्सल्य और भक्ति रस को भी जोड़ा गया है।
6️⃣ रस के उदाहरण लिखो?
📌 श्रृंगार रस:
बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
सौंह करै भौंहनि हँसै, दैन कहै नहि जाय।
📌 हास्य रस:
बुरे समय को देख कर गंजे तू क्यों रोय।
किसी भी हालत में तेरा बाल न बाँका होय।
(अन्य रसों के उदाहरण ऊपर दिए गए मुख्य खंड में देखे जा सकते हैं।)
7️⃣ नौ रस क्या कहलाते हैं?
नौ रसों को नवरस कहा जाता है:
श्रृंगार, हास्य, रौद्र, करुण, वीर, अद्भुत, वीभत्स, भयानक और शांत रस।
8️⃣ नवरस में कितने रस होते हैं?
नवरस का अर्थ होता है “नौ रस” – काव्य के वे नौ भाव जो काव्य को पूर्णता प्रदान करते हैं।
9️⃣ काव्य में रस की परिभाषा क्या है?
काव्य में रस वह आनंदमयी अनुभूति है, जो कविता, नाटक या गद्य के माध्यम से पाठक या श्रोता को होती है।
🔟 काव्य में रस की अवधारणा क्या है?
भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र में रस की व्यापक व्याख्या की है। यह माना गया कि ब्रह्मा ने देवताओं के मनोरंजन हेतु नाट्यवेद की रचना की और इसमें रसों की उत्पत्ति हुई।
नाट्यशास्त्र के छठे और सातवें अध्याय में रस और भावों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
नाट्यशास्त्र को पंचम वेद भी कहा गया है।
1️⃣1️⃣ काव्य में रस का क्या महत्व है?
काव्य में रस का स्थान मूल आत्मा के रूप में है।
उक्त वाक्य प्रसिद्ध है – “रसौ वै स:” अर्थात वह परमात्मा ही रस रूप है।
भरतमुनि ने कहा – “रसात्मकम् वाक्यम् काव्यम्” – रसयुक्त वाक्य ही काव्य होता है।
काव्य में भाव-सौन्दर्य, विचार, नाद और अप्रस्तुत योजना जैसे तत्त्वों में सबसे प्रमुख स्थान रस का होता है।
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